रचनाकार से संवाद : मंटो को याद करने का मतलब
आज हिन्दुस्तान की जनता के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकतंत्र को बचा लेना है। देश की साझी संस्कृति और साझी विरासत को बचा लेना है। सहमति के साथ-साथ असहमति की संस्कृति को बचा लेना है। क्योंकि अब ये सारी चीजें विगत की यादें या कथा-आख्यान की चीजें बनने की सीमा तक पहुंच गई हैं। आज भारतीय राजनीति भयानक संकट के दौर से गुजर रही है। सत्तारूढ़ पार्टी पूरे देश को एक खास रंग में रंगने की कवायद में एड़ी चोटी का पसीना एक किए हुए हैं। झूठ को एक शैली के रूप में विकसित किया जा रहा है। एक दूसरे के बीच राग और विश्वास को छीनकर , संदेह और भ्रम का माहौल बनाये जाने की पुरजोर कोशिश जारी है। ज्ञान , चिंतन और आलोचनात्मक विवेक की स्थली विश्वविद्यालयों को युद्ध-क्षेत्र में तब्दील करने की कवायद जोरों पर है। जेएनयू , हैदराबाद , बीएचयू के बाद अब एएमयू की बारी है। युवा वाहिनी की गुंडागर्दी को जिन्ना विवाद का नाम देकर पूरे देश में विश्वविद्यालय को बदनाम करने की नापाक कोशिश की जा रही है। अलीगढ विश्वविद्यालय विवाद के नाम पर चुनाव पूर्व बहुसंख्यक वोट के ध्रुवीकरण के इस शातिर खेल को देश की जनता अब समझने...