विमर्शक बारह मास : महत्वपूर्ण अंतरविषयी पुस्तक
मैथिली मे वैचारिक पोथीक भारी अकाल रहल अछि। एहि अकालक कारण कें ताकब कठिन स' बे सी असुविधाजनक । मैथिली मे आलोचना , समीक्षाक दरिद्र्य एही वैचारिकताक अभाव मे निहित अछि। एहि दृष्टियें साहित्यकार विभूति आनंद आ इतिहासकार अयोध्यानाथ झाक संयुक्त संपादन मे प्रकाशित पोथी ' विमर्शक बारह मास ' अत्यंत उत्साहजनक अछि। मैथिली मे कदाचित एहन पुस्तक नहि छल। संप्रति अंतरविषयी अध्ययन कें बहुत महत्व देल जाइछ। ' विमर्शक बारह मास ' सुच्चा आ विलक्षण गुणवत्तापूर्ण अंतरविषयी पुस्तक अछि। एकर संपादक द्वय स्वयं अंतर्विषयी छथि। एहि पुस्तक मे बारह विषय मे देल गेल विस्तृत एकल व्याख्यान कें लिप्यंतरित कए पुस्तक तैयार कयल गेल अछि। ई व्याख्यान व्यवस्थित , सुनियोजित आ सुचिंतित तरीका सँ अपन-अपन क्षेत्रक विशेषज्ञ सँ कराओल गेल छल। बारहो विषयक शीर्षके पढ़ि पुस्तकक सार्थकता आ अर्थवत्ताक अनुमान लगाओल जा सकैछ। तिरहुतिया मंदिर , पनिया अकाल , मिथिला मे कबीरक धमक , कबिर काने क , किरिसि करिए मन लाए , देसिल ब...