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ऋतुराज की कविता : ज़िन्दगी के अधूरेपन का महात्म्य

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                               ऋतुराज कवि हैं , कवि से पहले  एक संवेदनशील मनुष्य हैं  और उनकी संवेदनशीलता विकास के द्रुतगामी रथचक्र में पीछे... बहुत पीछे छूट गए वैसे लोगों के प्रति है जिनकी नागरिकता आज खतरे में है|  जिन्हें अब सपने आने भी बंद हो गए हैं| अधूरापन जिनकी नियति है | ऋतुराज की कविता ऐसे लोगों को संबोधित है जो बस जिये जा रहे हैं, जिनकी जीने की चाहत बस आज का दिन निपट जाने तक सिमट गया है |  ये ऐसे बेघर लोग हैं, जिनसे सरकार घर ही नहीं जमीन की रसीदें भी मांग रही है| ये कवि के ‘अपने लोग’ हैं- बिल्कुल अकलुषित और बेजान ये मेरे लोग धरती बसाते हैं पर अभी तक भी उजड़े हैं वक्त का सैलाब इन्हें घोंसले-सा काटकर निकल गया है इनकी आँखों में बेघर होने का खालीपन है         (अपने लोग ,   पुल पर पानी, 1981, राजकमल प्रकशन, पृष्ठ 49) कवि के ऐसे फटेहाल ‘अपने लोग’ आज के ‘शाइनिंग इंडिया’...

रेडलाइट: वर्जित क्षेत्रक कथायात्रा

दीपिका झाक  कथा-संग्रह ' रेडलाइट ' मैथिली कथासाहित्य मे एकटा एहन वर्जित क्षेत्र मे प्रवेश करबाक साहस करैत अछि, जाहि विषय पर  सामान्यतया मैथिल समाज बातो कर'  नहि चाहैत अछि। वर्जित क्षेत्रसँ आशय ई  जे ओ एहन विषय सभ पर कथा लिखैत छथि जे समाज मे ' टैबू ' मानल जाइत अछि। एहि 'निषिद्ध' परिक्षेत्र मे दीपिका निधोक  प्रवेश करैत छथि। स्त्रीक मासिक धर्मक प्रसंग हो वा प्रेमहीन दाम्पत्य-रतिक प्रश्न, सेक्स वर्करक दुःखद गलीज जीवन हो वा लिव-इन रिलेशनशिप, बिनु बियाहे मातृत्व प्राप्त करबाक आकांक्षा हो अथवा परिवारक भीतर होइत यौन शोषण (Intrafamilial Sexual Abuse)—एहि सभ विषयकेँ ओ अपन कथाक केन्द्र बनबैत छथि। स्त्री-विमर्शक आधा-छिधा समझ केर आधार पर एहि कथा सभ केँ खारिज कऽ देब अथवा अनावश्यक कहि देब जतेक सरल, ओतबे कठिन एहि कथासभक प्रश्नसभ सँ मुठभेड़ करब, ओकर  अनिवार्यता बुझब आ ओकर मर्म धरि पहुँचब।   कारण ई जे संकलित कथा सभ एहन सार्वभौमिक विषय पर चर्चा नहि करैत अछि जाहिसँ कोनो व्यक्तिगत असुविधा  हो। गरीबी, लाचारी, विवाह दान, भ्रष्टाचार जेहन अपेक्षाकृत सुरक्षित विषय सभक बदला...